Podcast: गर्भावस्था में विटामिन डी की खुराक -सूचित निर्णय

गर्भावस्था  में  बहुत  सी  महिलाओं  में  विटामिन  डी  की कमी  पायी   जाती  है  जिसे पूरा  करने के लिये   उन्हें विटामिन डी की खुराक देने के बारे में भी सोचा जाता है। जनवरी 2016 में पुएर्तो   रीको   विश्विद्यालय   से   क्रिटियना  पलासियस  और साथियों  ने  २०११ में छपे अपने cochrane  विश्लेषण  में   नए  तथ्ये  जोड़े। इस के बारे में विस्तार आगे  हैं ।

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गर्भावस्था  में  बहुत  सी  महिलाओं  में  विटामिन  डी  की कमी  पायी   जाती  है  जिसे पूरा  करने के लिये   उन्हें विटामिन डी की खुराक देने के बारे में भी सोचा जाता है। जनवरी 2016 में पुएर्तो   रीको   विश्विद्यालय   से   क्रिटियना  पलासियस  और साथियों  ने  २०११ में छपे अपने cochrane  विश्लेषण  में   नए  तथ्ये  जोड़े। इस के बारे में विस्तार आगे  हैं ।

उनके विश्लेषण के अनुसार दुनिया भर में गर्भवती महिलाओं में विटामिन डी का आभाव या कमी पायी जाती है । ऐसी महिलाओं को विटामिन डी की खुराक देने से उनके शरीर में इस विटामिन की मात्रा में सुधार देखा जा सकता है और कुछ जांचो के अनुसार यह गर्भवस्था के अनचाहे नतीजों से बचाव भी करता है। उनका cochrane विश्लेषण खोज करता है कि क्या विटामिन डी अकेले या कैल्शियम के साथ मिला कर गर्भवती महिला को खिलाना मां और नवजात बच्चे के लिए लाभदायक हैं । उनके विश्लेषण के अनुसार यह फायदेमंद तो हो सकता है पर इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतने की अवशयकता भी है क्यों कि मौजूदा सुबूत ज़्यादा ठोस नहीं है । पहली बार उनका यह विश्लेषण 2011 में छपा था और इस नए संस्करण में कुल 15 अध्यन हैं जिनमें करीब 3000 महिलाएं शामिल हैं । नौ अध्यनो में विटामिन डी की खुराक की तुलना बिना खुराक या बिना किसी असर की दवा से की गयी और बाकी छह अध्यनो में विटामिन डी और कैल्शियम के जोड़ की खुराक की तुलना बिना विटामिन डी खुराक के साथ की गयी।
सात अध्यन जिन में 868 महिलाओं ने भाग लिया ,में पाया गया कि जिन गर्भवती महिलाओं को सिर्फ विटामिन डी की खुराक दी गयी उनमें 25-hydroxyvitamin D (जो कि विटामिन डी का सक्रिय रूप है ),की मात्रा उन महिलाओं से ज़्यादा पायी गयी जिन्हे विटामिन दी की खुराक नहीं दी गयी या फिर जिन्हें बिना असर की दवाई दी गयी । इसके साथ दो अन्य अध्यन जिनमें 200 महिलाएं शामिल थी में पाया गया कि जिन महिलाओं को विटामिन डी दिया गया उनमें गर्भावस्था की तकलीफें जैसे कि बढ़ा हुआ रक्तचाप और पेशाब में प्रोटीन की घटनाएं कम पायी गयी ।
बच्चों की बात करें तो जिन गर्भवती महिलाओं ने विटमिन डी की खुराक ली उन में न सिर्फ समय से पहले बच्चे के पैदा होने खतरा कम पाया गया बल्कि उनमें २५०० ग्राम से कम वज़न के बच्चे के पैदा होने की संभावना भी कम पायी गयी। जबकि जिन महिलाओं को विटामिन डी की खुराक नहीं दी गयी या फिर बिना असर की दवाई दी गयी, उनमें ऐसा कुछ भी नहीं पाया गया ।
जिन महिलाओं को विटामिन डी कैल्शियम की साथ मिला कर दिया गया उनमें गर्भावस्था की तकलीफें जैसे कि बढ़ा रक्तचाप और पेशाब में प्रोटीन की घटनाएं 50 % कम पायी गई परन्तु समय से पहले बच्चा जन्म लेने कि घटनाएं 50% अधिक पायीं गयीं। जबकि जिन महिलाओं को कोई खुराक नहीं दी गयी उनमें ऐसा कुछ नहीं देखा पाया गया ।
इस विश्लेषण से पता चला कि नए जोड़े गए अध्यनों में गर्भावस्था में विटामिन डी की खुराक अकेले या कैल्शियम के साथ मिला कर देने के असर के बारे में ज़्यादा पुख्ता सुबूत मिले हैं ।
गर्भवती महिलाओं को विटामिन डी की खुराक देने से गर्भावस्था की अवधी पूरी होने तक शरीर में 25-हाइड्रॉक्सिविटामिन डी की मात्रा बढ़ जाती और इस से गर्भावस्था की तकलीफें जैसे कि बढ़ा रक्तचाप और पेशाब में प्रोटीन या फिर समय से पहले बच्चा पैदा होना या अविकसित बच्चा पैदा होने जैसी तकलीफें कम हो जाती हैं.।हालाँकि कैल्शियम के साथ मिला कर देने से समय से पहले शिशु के जन्म लेने की सम्भावना बढ़ जाती है।किसी भी अध्यन में इनके हानिकारक प्रभावों के बारे में कोई जानकारी नहीं पायी गयी ।
गर्भावस्था में बढ़ी हुई 25-hydroxyvitamin D की मात्रा का महत्व अभी भी अस्पष्ट है और इसलिए इस विश्लेषण के तथ्यओं को सावधानी के साथ इस्तेमाल किया जाना चाहिए । यह अभी भी साफ़ नहीं है कि क्या विटामिन डी जच्चा और बच्चे के लिए हर मायने में लाभदायक है और यह सभी गर्भवती महिलाओं को को नियमित प्रसवपूर्व देखभाल के रूप में दिया जा सकता है ? इस उलझन को सुलझाने के लिए उच्च दर्जे के परीक्षणों से मिले सुबूतों की आवश्य्कता है ।

यदि आप इस विषय  के बारे में और ज़्यादा विस्तार से जानना  चाहते है तो इस विश्लेषण के नए संस्करण  और इस वर्तमान  विश्लेषण को cochrane  library dot कॉम पर ढूंढ सकते है ।

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